Tuesday, September 23, 2008

इक ख्वाब



इक ख्वाब देखता हूँ मैं, इक गाँव देखता हूँ मैं,
मिलता जहाँ खुदा है, वो राह देखता हूँ मैं|

इंसान देखता हूँ मैं, जो "मुहब्बत" करे है ख़ुद से,
हर आदमी "खुदा" है, वो जहान देखता हूँ मैं|

हाँ देखता हूँ ख़्वाबों को हकीकत में बदलता,
मिल जाए सबको "सब कुछ", वो ख्वाब देखता हूँ मैं|

सपनों की है ये दुनिया, कहता है मुझसे क्यूँ "तू",
कर ले इन्तहा जुल्म की , उस में भी अपनी "रजा" देखता हूँ मैं|

©copyright protected 1985-............

1 comment:

AmitASH said...

It has nothin to do wid wot tarun has posted here...as the depth of lines sailed over ma head but undoubtedly the lines are beautiful...
Wot i wanted to say was the profile pic is lookin real cool wid that beard on...:-)